Tuesday, November 25, 2025

Karni Mata Rat Temple, Deshnok

 

Deshnok का Karni Mata Rat Temple – एक लोकल गाइड के साथ अनोखा अनुभव

राजस्थान अपने रंग-रूप, संस्कृति, देवस्थानों और मान्यताओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। लेकिन जब बात आती है चूहों के मंदिर की, तो हर कोई हैरान रह जाता है—पर हाँ, ये बिल्कुल सच है!
बीकानेर के पास स्थित करणी माता मंदिर, देशनोक, लगभग 25,000 से अधिक पवित्र चूहों का घर है। लोग इन्हें “काबा” कहते हैं और मानते हैं कि ये उनके पूर्वजों का पुनर्जन्म हैं।

एक लोकल गाइड के तौर पर मैं आपको इस अनोखे, रहस्यमयी और आकर्षक स्थल की पूरी यात्रा करवाता हूँ।




देशनोक कहाँ है?

देशनोक, बीकानेर से लगभग 30 किलोमीटर दूर एक छोटा सा कस्बा है। यहीं स्थित है विश्व-प्रसिद्ध Karni Mata Temple
स्थानीय मान्यता के अनुसार, करणी माता देवी दुर्गा का अवतार थीं और 15वीं शताब्दी में उन्होंने कई चमत्कारिक कार्य किए।

माना जाता है कि मां करणी अपने भक्तों को मृत्यु के बाद चूहे का रूप देकर पुनः मानव जन्म देती हैं। इसलिए मंदिर में रहने वाले चूहों को बेहद पवित्र माना जाता है।


मंदिर पहुँचने पर कैसा अनुभव होता है

मंदिर के बाहर पहुँचते ही सबसे पहले आपको जूते-चप्पल उतारने होते हैं।
ज्यादातर लोग नंगे पैर जाते हैं, लेकिन अगर आप थोड़ा आराम चाहते हैं तो मोज़े पहन सकते हैं—ठीक वैसा ही जैसा मैं सलाह देता हूँ।

भीड़ में स्थानीय भक्त, परिवार, और दूर-दराज से आए लोग एक-एक करके मंदिर में प्रवेश करते हैं।

अंदर जाते ही आपको पहली झलक में ही चारों ओर छोटे-छोटे काले चूहे भागते-दौड़ते दिखने लगते हैं।
लेकिन ध्यान रखें—ये चूहे डरावने नहीं होते, बल्कि बहुत छोटे, हल्के और शांत स्वभाव के होते हैं।


मंदिर के पवित्र चूहे

मंदिर में आपको जगह-जगह दूध, नारियल, अनाज और मिठाई से भरी थालियाँ नजर आएँगी।
भक्त मानते हैं कि इन चूहों को खिलाना सौभाग्य देता है।

सबसे खास बात:
अगर कोई चूहा आपके पैर के ऊपर से गुजर जाए, तो इसे बहुत शुभ माना जाता है।
और अगर आपकी किस्मत बहुत अच्छी हो, तो आप एक सफेद चूहा भी देख सकते हैं—जो और भी बड़ा सौभाग्य लाता है।

मंदिर के खुले हिस्सों पर एक बड़ी जाली भी लगी रहती है ताकि चील या बाज इन चूहों को नुकसान न पहुँचा सकें।


एक दिलचस्प घटना

कई पर्यटक पहली बार आते हैं, तो चूहों की तेजी देखकर घबरा जाते हैं।
अक्सर गलती से लोग किसी चूहे की पूँछ पर पैर रख देते हैं—और फिर भक्तों की नजरें उन पर टिक जाती हैं!

याद रखें—
मंदिर के चूहों को चोट पहुँचाना एक बड़ा अपराध माना जाता है।
इसलिए धीरे-धीरे चलें, आसपास ध्यान रखें और सम्मान बनाए रखें।


मंदिर के पुजारी से मुलाकात

यदि आपकी किस्मत अच्छी रही तो आपको पुजारीजी से मिलने का मौका भी मिल सकता है।
वे बताते हैं कि यहाँ आने वाले लोग करणी माता के साथ-साथ अपने पितरों की पूजा भी करते हैं।

वे यह भी बताते हैं कि—
सिर्फ मंदिर परिसर के चूहे ही पवित्र माने जाते हैं, बाहर के चूहों को नहीं।
यह इस स्थल की सबसे अनोखी बातों में से एक है।


मेरी सलाह – किसे जाना चाहिए और किसे नहीं

👉 अगर आप चूहों से बहुत डरते हैं—तो यह स्थान आपके लिए नहीं है।
👉 लेकिन अगर आप संस्कृति, लोककथाओं और अनोखे अनुभवों के शौकीन हैं—तो यह मंदिर अवश्य देखें।

याद रखें:
मंदिर से निकलने के बाद पैर अच्छी तरह धोना या साफ मोज़े पहनना बेहतर रहता है।


कब जाएँ? (Best Time to Visit)

सुबह – सबसे अच्छा समय, रोशनी सुंदर होती है और चूहे बहुत सक्रिय होते हैं।
शाम – दूसरा अच्छा समय।
दोपहर – चूहे ज़्यादातर छाया में छिप जाते हैं।


कैसे पहुँचे + कुछ ज़रूरी टिप्स

  • बीकानेर से मात्र 1 घंटे की ड्राइव

  • टैक्सी/जीप सबसे अच्छा विकल्प

  • प्रवेश निःशुल्क

  • कैमरा शुल्क लागू हो सकता है

  • अपने साथ अतिरिक्त मोज़े रखें

  • गंदे मोज़ों के लिए छोटी प्लास्टिक पॉलिथीन रखें

  • बाहर पानी व चूहों को खिलाने का सामान बेचने वाली कई दुकानें मिल जाएँगी


अंत में—क्या यह मंदिर आपकी यात्रा के लायक है?

हाँ—यदि आप राजस्थान की उन मान्यताओं और रहस्यों को समझना चाहते हैं जो दुनिया में कहीं और नहीं मिलते।
यह मंदिर आपको चौंकाता है, आकर्षित करता है और भारतीय संस्कृति की गहराई से परिचय कराता है।

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